श्योपुर।  अत्यंत हर्ष का विषय है कि प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता ‘गामिनी’ ने 3 शावकों को जन्म दिया है। श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में आए चीतों के तीन वर्ष पूर्ण होने के साथ यह 9वां सफल प्रसव है। भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर अब 38 हो गई है। यह पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है।

ऐतिहासिक शुरुआत

17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीकी देश नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। इस प्रकार भारत में कुल 20 चीतों के साथ पुनर्स्थापन अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई।

 क्यों चुना गया कूनो?

विशेषज्ञों ने कई वर्षों के अध्ययन के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान को उपयुक्त पाया। इसके प्रमुख कारण हैं: विस्तृत घासभूमि और खुला वन क्षेत्र पर्याप्त शिकार प्रजातियाँ (चितल, सांभर आदि) कम मानव हस्तक्षेप पहले से विकसित वन्यजीव प्रबंधन तंत्र कूनो का क्षेत्रफल लगभग 748 वर्ग किलोमीटर है, जो चीतों के अनुकूल प्राकृतिक वातावरण प्रदान करता है।

 अब तक की प्रगति

कई चीतों को सफलतापूर्वक खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है। कुछ मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया, जो इस परियोजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है। रेडियो कॉलर और 24×7 निगरानी से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। कुछ चीतों की मृत्यु भी हुई है, जिनके कारणों में स्वास्थ्य जटिलताएँ, अनुकूलन की चुनौतियाँ और प्राकृतिक कारण शामिल रहे। वन विभाग के अनुसार, यह दीर्घकालिक परियोजना है और शुरुआती उतार-चढ़ाव स्वाभाविक माने जा रहे हैं।

                                  

चुनौतियाँ

नए वातावरण में अनुकूलन जलवायु व पारिस्थितिकी में अंतर सीमित जेनेटिक विविधता मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर आबादी बनने में 10–15 वर्ष तक का समय लग सकता है।

राष्ट्रीय महत्व

भारत में 1952 में चीता को आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया था। यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय (Intercontinental) बड़े मांसाहारी प्राणी का पुनर्स्थापन कार्यक्रम है। इससे घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।

आगे की योजना

वन विभाग भविष्य में चीतों की संख्या बढ़ाने और अन्य उपयुक्त स्थलों पर उन्हें बसाने की योजना पर कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश अब “चीता स्टेट” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।