टीएमसी में सियासी भूचाल: बागी सांसद पहुंचे भूपेंद्र यादव के पास, बढ़ीं अटकलें
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष की आग अब विधायकों से बढ़कर सांसदों तक पहुँच गई है, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। पार्टी के कई बागी नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव से उनके घर पर मुलाकात की है। इस अहम बैठक में टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सयानी घोष शामिल थीं, और उनके साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद से ही राज्य में किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की अटकलें तेज हो गई हैं।
लोकसभा में टीएमसी को लग सकता है बड़ा झटका
सूत्रों के हवाले से जो खबरें आ रही हैं, वे टीएमसी आलाकमान की चिंता बढ़ाने वाली हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के 19 असंतुष्ट सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिसमें मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। दावा यहाँ तक किया जा रहा है कि इन सांसदों ने अपने दस्तखत वाला एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं और अगर 19 सांसदों के बगावत की बात सच साबित होती है, तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा। हालांकि, इस पूरे मामले पर टीएमसी की तरफ से अभी तक कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
विधानसभा में भी बगावत, 64 विधायकों के समर्थन का दावा
सांसदों के अलावा राज्य विधानसभा में भी टीएमसी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी से बाहर निकाले जा चुके विधायक ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें हाल ही में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली है, उन्होंने कोलकाता में एक बहुत बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि टीएमसी के 64 विधायक उनके साथ हैं और वे जल्द ही इस बात का औपचारिक पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपने वाले हैं।
अलग गुट बनाकर चलेंगे ऋतब्रत बनर्जी
ऋतब्रत बनर्जी ने साफ कर दिया है कि उनका यह नया गुट अब एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ काम करेगा और बंगाल के हितों को ध्यान में रखकर आगे के फैसले लेगा। गौरतलब है कि ऋतब्रत बनर्जी को 3 जून को टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। इस फैसले के बाद से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में समीकरण हर दिन बहुत तेजी से बदल रहे हैं।

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