दक्षिण एशिया में गर्मी से निपटने के लिए हीट एंड हेल्थ हब शुरू
दिल्ली। दक्षिण एशिया में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और उससे जुड़े स्वास्थ्य खतरों को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर साउथ एशिया हीट एंड हेल्थ हब की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य क्षेत्र के देशों को एक साझा मंच पर लाकर गर्मी से निपटने के लिए बेहतर रणनीतियां तैयार करना और लोगों को सुरक्षित रखना है। इस हब की मेजबानी नई दिल्ली स्थित काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) कर रहा है। इसमें सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलेबोरेटिव और नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल समेत अन्य कई प्रमुख संस्थान भागीदार के रूप में जुड़े हैं। यह पहल ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क के तहत शुरू की गई है, जिसका नेतृत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व मौसम विज्ञान संगठन कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एशिया अन्य क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। पिछले एक दशक में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक दक्षिण एशिया की करीब 90 प्रतिशत आबादी भीषण गर्मी का सामना करेगी।
भारत में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां करीब 57 प्रतिशत जिले पहले से ही उच्च या बहुत उच्च गर्मी जोखिम की श्रेणी में हैं। सीईईडब्ल्यू के सीईओ डॉ. अरुणाभ घोष ने कहा कि भीषण गर्मी महज एक मौसमी खतरा भर नहीं है। यह संपूर्ण दक्षिण एशिया में सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक उत्पादकता और बुनियादी ढांचे के लिए व्यवस्थागत जोखिम है। इस हब का मुख्य उद्देश्य सरकारों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इसके जरिए समय पर चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) को मजबूत किया जाएगा, सुरक्षित कार्य समय तय करने में मदद मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाएगा।

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