हाथियों की मौत का सिलसिला जारी, रायगढ़ में शावक का शव मिलने से सनसनी
रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से वन्यजीव प्रेमियों को परेशान कर देने वाली एक दुखद खबर सामने आई है, जहां नदी पार करने की कोशिश में हाथी के एक छोटे बच्चे (शावक) की पानी में डूबने से मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को नदी से बाहर निकाला। फिलहाल, वन्यजीव अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
ग्रामीणों ने पानी में तैरता देखा शव
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रायगढ़ वन मंडल के अंतर्गत आने वाले खरसिया रेंज की गुरदा संगम नदी में सोमवार सुबह करीब 9:00 बजे स्थानीय ग्रामीणों ने एक छोटे हाथी के शव को पानी के तेज बहाव में बहते हुए देखा। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए इसकी सूचना तुरंत वन अमले और स्थानीय 'हाथी मित्र दल' को दी। खबर मिलते ही वन परिक्षेत्राधिकारी अपनी टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचे और क्रेन व रस्सियों की मदद से शावक के शव को पानी से सुरक्षित बाहर निकलवाया।
50 हाथियों का विशाल दल इलाके में सक्रिय
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से बारभौना और ऐडू के जंगलों और ग्रामीण इलाकों के आस-पास 50 से अधिक हाथियों का एक बड़ा झुंड लगातार डेरा डाले हुए है। आशंका जताई जा रही है कि रविवार-सोमवार की दरमियानी रात को यह दल पानी पीने या नदी पार करने के लिए गुरदा संगम नदी की तरफ आया होगा। इसी दौरान तेज बहाव या गहरे पानी की चपेट में आने से यह मासूम शावक अपने झुंड से बिछड़ गया और डूबने के कारण उसकी जान चली गई।
वन प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
एक चौंकाने वाले आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, जनवरी 2026 से लेकर जून 2026 के शुरुआती हफ्ते तक रायगढ़ जिले के अलग-अलग वन क्षेत्रों में कुल 9 हाथी शावकों की असमय मौत हो चुकी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से अधिकांश मौतें पानी में डूबने की वजह से हुई हैं। इतनी छोटी अवधि में इतनी बड़ी संख्या में गजराज के बच्चों की मौत होना वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था, मॉनिटरिंग और वन्यजीव प्रबंधन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। इसके बाद बिलासपुर और रायपुर के मुख्यालयों से भी मामले की निगरानी तेज कर दी गई है।
स्वाद और सेहत का अनोखा संगम: घर पर बनाएं मूंग दाल और टमाटर बेस कढ़ी
अगर आप रोज की साधारण कढ़ी खाकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो भोजन का जायका बदलने के लिए बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक पसंद की जाने वाली इन दो खास कढ़ी रेसिपी को आजमा सकते हैं:
1. मूंग दाल मंगौड़ी वाली कढ़ी
पारंपरिक बेसन के पकौड़ों की जगह मूंग दाल के कुरकुरे मंगौड़ों के साथ बनाई जाने वाली यह कढ़ी स्वाद में लाजवाब और प्रोटीन से भरपूर होती है।
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बनाने की विधि: सबसे पहले मूंग की दाल को पानी में भिगोकर दरदरा पीस लें और इसमें स्वादानुसार मसाले मिलाकर छोटे-छोटे पकौड़े तल लें। इसके बाद दही और बेसन का एक पतला घोल तैयार कर उसे धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक उबालें। कढ़ी में अच्छी उबाल आने के बाद तैयार मंगौड़ियों को उसमें डाल दें, ताकि वे कढ़ी को अच्छे से सोख लें। अंत में राई और कढ़ी पत्ते का छौंक लगाएं।
2. खट्टी-मीठी टोमैटो बेस कढ़ी
गर्मियों के इस मौसम में मुंह का स्वाद बदलने और पेट को ठंडक देने के लिए टमाटर के बेस वाली कढ़ी एक बेहतरीन और हल्का विकल्प है।
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बनाने की विधि: दही और बेसन का एक चिकना घोल बनाकर कड़ाही में पकने के लिए रख दें। जब घोल आधा पक जाए, तो उसमें ताजे टमाटरों को पीसकर बनाई गई प्यूरी (पेस्ट) शामिल करें। इसे धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि टमाटर का कच्चापन दूर न हो जाए। इस कढ़ी को हल्का खट्टा-मीठा स्वाद देने के लिए मामूली सा गुड़ मिला सकते हैं। तैयार होने पर हींग-जीरे का तड़का मारकर इसे गरमा-गरम चावल या फुल्के के साथ परोसें।

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