बच्चों की छोटी-छोटी समस्याओं को न करें नजरअंदाज
लंदन । बचपन में की गई छोटी-मोटी लापरवाही भी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं काफी आम हैं, लेकिन माता-पिता अक्सर इनके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो बच्चे को कई गंभीर परेशानियों से बचाया जा सकता है। बच्चों का पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए छोटी-छोटी समस्याएं भी जल्दी बढ़ सकती हैं और आगे चलकर बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि माता-पिता को बच्चों के हर छोटे बदलाव पर गहरी नजर रखनी चाहिए ताकि वे स्वस्थ और खुशहाल रह सकें। पहला और सबसे आम संकेत है कब्ज। यदि आपका बच्चा कठोर मल त्याग करता है, शौच के समय रोता-चिल्लाता है, या शौच करने से डरने लगता है, तो यह कब्ज का संकेत हो सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है दस्त।
बच्चे को बार-बार पतला मल आना दस्त का लक्षण है, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है और वह सुस्त व कमजोर दिखने लगता है। तीसरा संकेत है पेट में जलन और एसिडिटी। यदि बच्चा बार-बार पेट में जलन की शिकायत करता है, उसे उल्टी आती है या खट्टी डकारें आती हैं, तो यह एसिडिटी या पाचन संबंधी गड़बड़ी का संकेत है। चौथी समस्या है भोजन असहजता या फूड इनटॉलेरेंस। इसमें बच्चा किसी विशेष भोजन, जैसे दूध, गेहूं या ग्लूटेन, को ठीक से पचा नहीं पाता। इसके लक्षण पेट फूलना, दर्द होना या शरीर पर चकत्ते पड़ना हो सकते हैं। पांचवीं समस्या कृमि संक्रमण है, जो अस्वच्छता और साफ-सफाई की कमी के कारण बच्चों में काफी आम है। इसमें बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत कर सकता है, उसकी भूख कम हो सकती है, वजन नहीं बढ़ता और कभी-कभी नींद में दांत पीसने जैसी आदतें भी देखने को मिलती हैं।

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