दिल्ली-यूपी से साउथ तक बुलेट ट्रेन का जाल, घंटों का सफर मिनटों में
नई दिल्ली: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। देश को अगले साल (2027) के मध्य तक अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी, जो मुंबई और अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी। इस बीच, केंद्र सरकार ने देश में सात नए बुलेट ट्रेन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को भी मंजूरी दे दी है। इन नए रूट्स के शुरू होने से कई प्रमुख शहरों के बीच का सफर घंटों के बजाय मिनटों में तय होने लगेगा। रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन सभी कॉरिडोर पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर और उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित स्टेशन्स
नए स्वीकृत कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बेहद अहम है। इस रूट के बनने से दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे और दिल्ली से वाराणसी का सफर सिर्फ 3 घंटे 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। रेल मंत्री के अनुसार, इस कॉरिडोर का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख शहरों में स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इनमें दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। हालांकि, स्टेशनों की अंतिम सूची पर आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा।
देश के अन्य प्रमुख रूट्स पर सफर का समय
सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा के समय में भारी कटौती होगी। विभिन्न शहरों के बीच का सफर इस प्रकार सिमट जाएगा:
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मुंबई से अहमदाबाद: 1 घंटे 57 मिनट
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बेंगलुरु से चेन्नई: 73 मिनट (1 घंटा 13 मिनट)
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पुणे से हैदराबाद: 2 घंटे 8 मिनट
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बेंगलुरु से हैदराबाद: 2 घंटे 10 मिनट
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मुंबई से पुणे: 48 मिनट
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दिल्ली से सिलीगुड़ी: 6 घंटे
जापान की शिंकान्सेन तकनीक और प्रोजेक्ट का इतिहास
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की सबसे पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जो 508 किलोमीटर लंबी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने संयुक्त रूप से रखी थी। यह पूरा प्रोजेक्ट जापान की विश्व प्रसिद्ध शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक और वहां की आर्थिक मदद (लोन) से तैयार किया जा रहा है। हालांकि, शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और विभिन्न सरकारी मंजूरियों में हुई देरी के कारण इसके समय में थोड़ा बदलाव हुआ है, और अब यह अगले साल के मध्य तक पटरी पर उतरने के लिए तैयार है।

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