राजधानी को मिली ई-बसों की सौगात, ट्रायल रन के साथ बदलेगी सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सार्वजनिक परिवहन इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत होने जा रही है। शहरवासियों को पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सफर का तोहफा देने के लिए पहली बार इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। शहर की सड़कों पर इन आधुनिक ई-बसों का ट्रायल रन (परीक्षण) आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है, जो आगामी पांच दिनों तक अलग-अलग और चुनिंदा रूटों पर लगातार जारी रहेगा। इस पांच दिवसीय परीक्षण के दौरान इन बसों की तकनीकी दक्षता, बैटरी बैकअप, सड़क पर पकड़ और संचालन से जुड़ी तमाम छोटी-बड़ी व्यावहारिक चुनौतियों का बारीकी से आकलन किया जा रहा है। राहत की बात यह रही कि परीक्षण के पहले ही दिन का ट्रायल पूरी तरह सफल रहा, जहां इन बसों ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हुए शहर के घाटी वाले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी बिना किसी तकनीकी रुकावट के अपना सफर सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया।
केवल भोपाल शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों तक होगा विस्तार
इन अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन केवल भोपाल शहर की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसका दायरा काफी बड़ा होगा। भविष्य की योजना के तहत इन बसों की सेवाओं को फंदा, औबेदुल्लागंज, सीहोर, मंडीदीप, भोजपुर और बिलखिरिया जैसे भोपाल के आसपास के तमाम प्रमुख क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा ताकि ग्रामीण और उपनगरीय इलाकों के यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। इस पूरी परियोजना की प्रगति का जायजा लेते हुए भोपाल की महापौर मालती राय और नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने खुद मौके पर पहुंचकर इन नई बसों का बारीकी से निरीक्षण किया और इनकी तमाम आधुनिक विशेषताओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा से लैस हैं ये नई इलेक्ट्रिक बसें
सड़कों पर यात्रियों को सुगम और सुरक्षित सफर कराने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी इन ई-बसों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम: प्रत्येक बस के भीतर कुल 6 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग बैरागढ़ स्थित मुख्य डिपो से लगातार की जाएगी।
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पूर्णतः वातानुकूलित (AC): ये सभी ई-बसें पूरी तरह से एयरकंडीशंड (एसी) हैं, जिससे चिलचिलाती गर्मी और उमस भरे मौसम में भी यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी या घुटन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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ऑटोमैटिक हाइड्रोलिक दरवाजे: बस में यात्रियों के सुरक्षित रूप से चढ़ने और उतरने के लिए दो आधुनिक हाइड्रोलिक दरवाजों की सुविधा दी गई है। इन दरवाजों को संचालित (खोलने और बंद करने) करने का पूरा नियंत्रण चालक के पास होगा।
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शानदार बैटरी बैकअप और स्पीड: एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह इलेक्ट्रिक बस लगातार 180 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय कर सकती है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर के भीतर इसकी अधिकतम गति सीमा के लिए स्पीड गवर्नर को 40 किलोमीटर प्रति घंटा पर निर्धारित किया गया है।
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यात्री क्षमता और दिव्यांग अनुकूल: बस के भीतर चालक को मिलाकर कुल 25 आरामदायक सीटें बनाई गई हैं। इसके अलावा इसमें दो दिव्यांग यात्रियों की व्हीलचेयर को सुरक्षित रूप से खड़ा करने के लिए विशेष स्थान दिया गया है, साथ ही बीच की गैलरी में यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करने के लिए पर्याप्त जगह भी मिलेगी।
दो अलग-अलग शिफ्टों में किया जा रहा है बसों का ट्रायल
वर्तमान में चल रहे परीक्षण चरण के दौरान इन बसों का संचालन सुचारू रूप से दो चरणों (शिफ्ट) में किया जा रहा है।
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प्रथम पारी: सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
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द्वितीय पारी: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।
फिलहाल इन बसों को बैरागढ़ डिपो से निकालकर पुराने भोपाल के विभिन्न इलाकों, बोर्ड ऑफिस चौराहा, रेलवे स्टेशन (प्लेटफॉर्म नंबर-1) और कोलार रोड स्थित बैरागढ़ चीचली के व्यस्त रूटों पर दौड़ाकर वहां के यातायात, सड़कों की स्थिति और ढलान वाले रास्तों का कड़ाई से परीक्षण किया जा रहा है।
कुल 41 बसों का होगा विशाल बेड़ा, डिपो में चार्जिंग की मुकम्मल व्यवस्था
नगर निगम के एमआईसी सदस्य मनोज राठौर से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक कुल 21 इलेक्ट्रिक बसें अपनी यात्रा पूरी कर भोपाल पहुंच चुकी हैं, जबकि अगले 10 से 12 दिनों के भीतर शेष 20 और नई बसें भी शहर में आ जाने की पूरी उम्मीद है। इन सभी आधुनिक बसों के सुचारू और निर्बाध संचालन के लिए बैरागढ़ स्थित डिपो परिसर में 11 हाई-पावर चार्जिंग पॉइंट पहले ही पूरी तरह तैयार किए जा चुके हैं, ताकि जब शहर में इनकी नियमित यात्री सेवाएं शुरू हों, तो बसों की चार्जिंग को लेकर किसी भी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक बाधा का सामना न करना पड़े।

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