सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन, सरकार से अपील; आंदोलन जारी रखने का ऐलान
नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव और जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 20वां दिन है। इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी लगातार समर्थन मिल रहा है, जिसके तहत आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने अनशन स्थल पर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। आंदोलनकारी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की वकालत कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक की गिरती सेहत पर डॉक्टरों की गंभीर चिंता
लगातार 20 दिनों से जारी अन्न त्याग के कारण सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य बेहद नाजुक दौर में पहुंच चुका है। डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई है कि अब तक उनका वजन नौ किलोग्राम से भी अधिक कम हो चुका है, जिससे उनके शरीर में गंभीर शिथिलता आ गई है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सतीश लांबा के अनुसार, वांगचुक का वजन घटकर अब मात्र 56.55 किलोग्राम रह गया है, जिसमें बीते 24 घंटों में ही 350 ग्राम की गिरावट आई है। उनका ब्लड प्रेशर 108/68 और ब्लड शुगर का स्तर 70 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक गिर गया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि शरीर की चर्बी और मांसपेशियों के घटने के बाद अब उनके आंतरिक अंगों पर इसका बेहद घातक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
संसद मार्च को लेकर अनशनकारी का अटूट और दृढ़ संकल्प
अपनी जान पर मंडराते खतरे और गिरते स्वास्थ्य के बावजूद सोनम वांगचुक के इरादे बेहद मजबूत नजर आ रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर उपस्थित जनसमुदाय और मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने अत्यंत भावुक लहजे में कहा कि वे आगामी 20 जुलाई तक हर हाल में अपने प्राणों को संभाल कर रखेंगे ताकि वे सभी प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर संसद भवन तक निकाले जाने वाले पैदल मार्च की अगुवाई कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि 20 जुलाई को निकाला जाने वाला यह शांतिपूर्ण मार्च अपने लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहा, तो भी वे इस आंदोलन को रुकने नहीं देंगे और अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे।
विपक्षी नेताओं का बढ़ता समर्थन और इस्तीफे की मांग
जंतर-मंतर पर चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने को विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का भारी समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वांगचुक से मुलाकात के बाद केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा और छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर चिंता व्यक्त की। आंदोलनकारियों का स्पष्ट रूप से आरोप है कि मई में आयोजित परीक्षा के दौरान जो धांधली और पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं, उसने देश के लाखों होनहार युवाओं के सपनों को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया है। इस बड़ी विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
20 जुलाई को संसद घेराव की बड़ी तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने आगामी कदम की घोषणा कर दी है। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक विशाल और शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मार्च को सफल बनाने के लिए देश भर के पीड़ित छात्रों, उनके अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों से भारी संख्या में दिल्ली पहुंचने की भावुक अपील की गई है। इस विशाल प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार पर चौतरफा दबाव बनाकर शिक्षा विभाग में पूर्ण पारदर्शिता लाना और भविष्य की परीक्षाओं की पवित्रता सुनिश्चित करना है।

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