पांचवें दिन मानसून सत्र में सियासी पारा हाई, अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसूनी सत्र का आज पांचवां और समापन दिवस बेहद हंगामेदार और महत्वपूर्ण होने जा रहा है। सदन की विधायी कार्यसूची के अनुसार, आज प्रश्नकाल के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल अपने-अपने विभागों से संबंधित तीखे सवालों के जवाब देंगे।
इसके साथ ही, वित्तीय पारदर्शिता के लिहाज से एक बड़ा कदम उठाते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी स्थानीय निकायों से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ विधायक गोमती साय, धर्मजीत सिंह और भईयालाल राजवाड़े विभिन्न संसदीय समितियों के प्रतिवेदनों (रिपोर्ट्स) को सदन के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी आर-पार की जंग
आज के पूरे सत्र का सबसे प्रमुख और बहुप्रतीक्षित केंद्र बिंदु विपक्ष (कांग्रेस) द्वारा विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाया जाने वाला अविश्वास प्रस्ताव रहने वाला है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत आज आधिकारिक रूप से सदन में सरकार की नीतियों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे। इस प्रस्ताव के पटल पर आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस और जुबानी तीर चलने की पूरी संभावना है, जिसके चलते सदन के भीतर का सियासी तापमान चरम पर पहुंचने के आसार हैं।
इतिहास में अब तक 9 बार आए प्रस्ताव, हर बार बची सरकारें
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अजीत जोगी सरकार का दौर: छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो सूबे में अब तक कुल 9 बार अविश्वास प्रस्तावों पर मैराथन चर्चाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार तत्कालीन सरकारें अपना बहुमत साबित करने में पूरी तरह सफल रहीं। राज्य की पहली विधानसभा के दौरान साल 2002 और 2003 में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।
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डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल सरकारें: इसके बाद, डॉ. रमन सिंह के 15 साल के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस ने साल 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कुल पांच बार अविश्वास का बिगुल फूंका। वहीं, इसके बाद आई भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ विपक्षी दल भाजपा ने साल 2022 और 2023 में दो बार यह प्रस्ताव लाया।
संसदीय इतिहास की सबसे लंबी और ऐतिहासिक बहस जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो लगातार 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी। विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाया जा रहा यह अविश्वास प्रस्ताव छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद का 10वां ऐतिहासिक प्रस्ताव होगा।

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