लंबे समय से अटैच शिक्षकों पर गिरेगी गाज, जांच में सामने आए 213 नाम
भोपाल:मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और गिरते शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में पदस्थ होने के बावजूद वर्षों से मंत्रालयों, कलेक्ट्रेट, जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों और अन्य प्रशासनिक संस्थानों में मलाईदार पदों पर अटैच (संबद्ध) होकर काम कर रहे शिक्षकों पर अब गाज गिरने वाली है। लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे प्रदेश से ऐसे सभी शिक्षकों का पूरा ब्यौरा तलब किया है। विभाग की शुरुआती जांच में ही 213 शिक्षकों के मूल स्कूलों से बाहर गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अधिकारियों का अनुमान है कि यह आंकड़ा आने वाले दिनों में हजारों तक पहुंच सकता है।
सभी जिलों से मांगी गई सूची, मूल संस्थाओं में वापसी के सख्त निर्देश
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को दोटूक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ किया है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे सभी शिक्षकों के अटैचमेंट को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और उन्हें अविलंब उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में वापस भेजा जाए। इस कड़े आदेश के बाद भोपाल, रीवा और जबलपुर सहित तमाम जिलों के शिक्षा विभागों में हड़कंप मच गया है और ऐसे शिक्षकों की सूचियां युद्ध स्तर पर तैयार की जा रही हैं।
वेतन रोकने की चेतावनी के बाद भी स्कूल लौटने से कतरा रहे रसूखदार शिक्षक
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब तक सामने आई 213 शिक्षकों की पहली सूची में सबसे अधिक 52 शिक्षक अकेले राजधानी भोपाल के विभिन्न दफ्तरों में संबद्ध पाए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि जो शिक्षक अपनी मूल शाला में जाकर कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे, उनका जुलाई माह का वेतन पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। इसके बावजूद कई रसूखदार शिक्षक अब भी स्कूल लौटने से कतरा रहे हैं। दरअसल, इन शिक्षकों को डर है कि स्कूल वापस जाने पर उन्हें रोजाना तय समय पर बायोमेट्रिक ई-अटेंडेंस लगानी होगी और 'जितनी अटेंडेंस, उतना वेतन' के कड़े नियमों के तहत काम करना पड़ेगा, जिससे उनकी मनमानी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
प्रशासनिक दबाव को दरकिनार कर शिक्षण व्यवस्था दुरुस्त करने पर रहेगा पूरा फोकस
इस पूरी मुहिम के बीच कुछ जिलों से यह खबरें भी आ रही हैं कि स्थानीय स्तर पर कुछ रसूखदार प्रशासनिक अधिकारी अपने चहेते शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं और वे जिला शिक्षा अधिकारियों पर इसके लिए अप्रत्यक्ष दबाव भी बना रहे हैं। हालांकि, लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि विभाग का पूरा फोकस केवल और केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था पर है। शिक्षकों को जनगणना, बीएलओ, सुपरवाइजर और अन्य क्लर्कियल कामों से पूरी तरह मुक्त कर वापस कक्षाओं में भेजने की यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य से कोई खिलवाड़ न हो सके।

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