नई दिल्ली। दिल्ली के बहुचर्चित आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद पीड़ित परिवार का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। वारदात के करीब 2331 दिन बाद आए इस अदालती फैसले से पीड़ित परिजनों ने राहत की सांस ली है। इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने बेहद खौफनाक और जटिल परिस्थितियों के बीच पारंपरिक गवाहों की कमी को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए दूर किया, जिससे न्याय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

फॉरेंसिक सबूत और डीएनए मिलान बने सबसे बड़ी ढाल

अंकित शर्मा के शरीर से बहे खून की बूंदें आखिरकार इस जघन्य कत्ल की सबसे बड़ी गवाह बनीं। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने नाले की दीवारों, प्लास्टिक शीट और कागज के टुकड़ों से जो खून के नमूने बरामद किए थे, उनका डीएनए मिलान सीधे अंकित के खून से हो गया। इसके अलावा, रोहिणी फॉरेंसिक लैब की इस रिपोर्ट के साथ-साथ आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले कॉल रिकॉर्ड, वॉयस सैंपल्स और आरोपी हसीन उर्फ मुल्लाजी द्वारा हत्या की बात कबूलने वाले ऑडियो रिकॉर्ड ने अदालत में बचाव पक्ष की हर दलील को ध्वस्त कर दिया।

चुनौतीपूर्ण माहौल में तकनीक की मदद से जुड़ीं कड़ियां

दंगों के खौफनाक माहौल के कारण शुरुआत में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाही देने के लिए खुलकर सामने आने को तैयार नहीं था। ऐसे में जांच एजेंसी ने अत्याधुनिक डेटा फिल्ट्रेशन, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) रिपोर्ट्स के जरिए मामले की जांच आगे बढ़ाई। पुलिस ने अदालत के समक्ष वे फुटेज पेश किए जिनमें भीड़ अंकित को खींचकर ले जाती दिखी और बाद में तीन लोग उनके शव को नाले में फेंकते नजर आए, जिसके दम पर कोर्ट ने मामले की एफआईआर में देरी और गवाहों पर उठाए गए सवालों को सिरे से खारिज कर दिया।

ताहिर की हवेली से लेकर नाले तक फैली खूनी साजिश

यह भयावह वारदात 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान हुई थी, जब ड्यूटी से घर लौटे अंकित शर्मा अचानक लापता हो गए थे। बाद में दयालपुर थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज होने के बाद चांद बाग नाले से उनका क्षत-विक्षत शव मिला, जिसके बदन पर धारदार हथियारों के 20 से अधिक गहरे जख्म थे। जांच के दौरान पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की बिल्डिंग की छत से भारी मात्रा में पत्थर, तेजाब की बोतलें और पेट्रोल बम बरामद हुए थे, जिससे यह साफ हो गया था कि इस पूरी हिंसक वारदात की पटकथा बेहद योजनाबद्ध तरीके से लिखी गई थी।

ताहिर हुसैन समेत पांच दोषी और सजा पर सुनवाई जल्द

अदालत ने अपने ऐतिहासिक 320 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया है कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए 91 गवाहों के बयानों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य सबूतों की मजबूत कड़ियों के आधार पर यह आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं। न्यायालय ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, अपहरण व आपराधिक साजिश रचने का मुख्य दोषी माना है, जबकि इस मामले में पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। दोषियों को दी जाने वाली सजा की अवधि पर अदालत आगामी 23 जुलाई को अंतिम सुनवाई करेगी।