खाद-बीज संकट और औद्योगिक हादसों पर विधानसभा में गरमाई बहस, विपक्ष ने किया वॉकआउट
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन बेहद ही हंगामेदार, गर्मागर्म बहस और तीखे राजनीतिक टकराव का गवाह बना। प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही प्रदेश के विभिन्न उद्योगों और कारखानों में लगातार हो रही दर्दनाक दुर्घटनाओं और सुरक्षा मानकों (सेफ्टी ऑडिट) की अनदेखी का मुद्दा सदन में गूंजा।
इसके बाद राज्य के किसानों से जुड़े खाद और उन्नत बीज की भारी किल्लत के मुद्दे पर विपक्षी विधायकों ने सरकार को चौतरफा घेरते हुए जमकर नारेबाजी की। सदन में मचे इस जबरदस्त हंगामे और सरकार के जवाबों से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने न केवल सदन से वॉकआउट किया, बल्कि भारी हंगामे के बीच कई विधायक गर्भगृह (वेल) में कूद पड़े, जिसके चलते विधानसभा की नियमावली के तहत वे स्वतः निलंबित हो गए।
242 औद्योगिक हादसों पर नेता प्रतिपक्ष ने दागे सवाल; वेदांता हादसे को लेकर उद्योग मंत्री से सीधे टकराए डॉ. चरणदास महंत
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य के उद्योगों में मजदूरों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद आक्रामक तरीके से उठाया:
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सेफ्टी ऑडिट पर सरकार को घेरा: डॉ. चरणदास महंत ने उद्योग विभाग से सीधे तौर पर लिखित और मौखिक जानकारी मांगी कि छत्तीसगढ़ के कितने कारखानों में अब तक सुरक्षा मानकों की समय पर जांच (सेफ्टी ऑडिट) नहीं की गई है, और वर्तमान नियमों के तहत इसे कितने अंतराल में करवाना अनिवार्य है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में अब तक 242 से ज्यादा छोटी-बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई स्थानीय मजदूरों की जान जा चुकी है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
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अनिल अग्रवाल का नाम लेकर तीखी नोकझोंक: जब उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि अति संवेदनशील और खतरनाक श्रेणी के 36 बड़े कारखानों में सेफ्टी ऑडिट की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, तो इस पर डॉ. महंत बिफर पड़े। उन्होंने कहा, "मंत्री जी, आप सदन के सामने सत्य कथन नहीं कह रहे हैं और सच्चाई को छिपा रहे हैं।" डॉ. महंत ने प्रसिद्ध वेदांता संयंत्र हादसे का विशेष जिक्र किया, जिसमें 25 मजदूरों की अकाल मौत हो गई थी। उन्होंने पूछा कि पुलिस की एफआईआर में नामजद कंपनी के प्रमुख निदेशक अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
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मंत्री देवांगन का कड़ा रुख: विपक्षी हमलों का जवाब देते हुए उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि वेदांता हादसे की सघन जांच अभी विवेचना के दौर में है और यह पूरा मामला वर्तमान में श्रम न्यायालय (लेबर कोर्ट) के अधीन विचाराधीन है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एफआईआर में निश्चित तौर पर अनिल अग्रवाल का नाम शामिल है, और सरकार की मंशा स्पष्ट है—मामले की जांच पूरी होते ही जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
खाद और बीज की कमी पर शून्यकाल में भारी हंगामा; 'किसान विरोधी सरकार' के नारों से गूंजा सदन
उद्योगों के बाद सदन में किसानों से जुड़ा सबसे संवेदनशील मुद्दा यानी खरीफ सीजन के दौरान सहकारी समितियों में खाद और बीज की भारी किल्लत का मामला उठा:
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विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव: मुख्य विपक्षी दल के सदस्यों ने इस अति-महत्वपूर्ण विषय पर बाकी सभी कार्यों को रोककर चर्चा कराने के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का आरोप था कि मानसून के इस महत्वपूर्ण समय में जब किसानों को बुवाई के लिए यूरिया और डीएपी खाद की सख्त जरूरत है, तब सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है और किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
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शून्यकाल में तीखी नारेबाजी: शून्यकाल के दौरान कांग्रेस और विपक्षी विधायकों ने वेल के पास आकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर 'किसान विरोधी' होने का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह शासन अन्नदाताओं के साथ घोर अन्याय कर रहा है। उन्होंने राज्य में खाद और बीज की कुल उपलब्धता और मांग पर सरकार से तुरंत श्वेत पत्र या स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
कृषि मंत्री के जवाब से भड़के विधायक; गर्भगृह में घुसते ही विपक्षी सदस्य हुए स्वतः निलंबित
इस गंभीर और हंगामेदार मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए कृषि मंत्री रामविचार नेताम खड़े हुए:
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असंतोषजनक जवाब का आरोप: कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि प्रदेश में खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसानों को कोई असुविधा नहीं हो रही है। लेकिन विपक्षी सदस्य उनके इस दावे से बिल्कुल भी सहमत नहीं हुए और उन्होंने मंत्री के बयान को जमीनी हकीकत से परे बताया।
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सदन के गर्भगृह में पहुंचे विधायक: विरोध की सीमा तब पार हो गई जब नारेबाजी करते हुए कांग्रेस के कई विधायक हाथ में तख्तियां लेकर सदन के गर्भगृह (वेल) के भीतर प्रवेश कर गए। छत्तीसगढ़ विधानसभा के स्थापित नियमों और मर्यादा के अनुसार, जैसे ही कोई सदस्य सदन के गर्भगृह में प्रवेश करता है, वह स्वतः ही निलंबित (सस्पेंड) मान लिया जाता है।
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कार्यवाही में बाधा: विपक्षी विधायकों के इस स्वतः निलंबन के बाद भी सदन के भीतर काफी देर तक अव्यवस्था और तीखी बहस का दौर चलता रहा, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि इस मानसून सत्र के आने वाले दिनों में भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच यह टकराव और उग्र रूप लेने वाला है।

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