विदेशी जंग ने छीनी बिहार के युवक की जिंदगी, शिप पर हमले में हुई मौत
गोपालगंज। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष की तपिश अब सात समंदर पार बिहार के घरों तक पहुंचने लगी है। जिले के थावे बाजार निवासी एक होनहार युवक की सुदूर विदेश में चल रहे युद्ध की भेंट चढ़ने की दर्दनाक खबर सामने आई है। इस हृदयविदारक सूचना के मिलते ही पूरे अंचल में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। मृतक की पहचान स्थानीय व्यवसायी संजय गुप्ता के पुत्र सोनू कुमार गुप्ता के रूप में की गई है, जो दुबई में एक अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट शिप (व्यापारिक जहाज) पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस अनहोनी के बाद से ही पीड़ित परिवार के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध के दौरान हुए मिसाइल हमले में गई जान
परिजनों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, मंगलवार की सुबह उन्हें एक बेहद खौफनाक फोन कॉल आया, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। उन्हें सूचित किया गया कि ईरान और अमेरिका के बीच समुद्र में हुए एक भीषण सैन्य हमले के दौरान सोनू कुमार गुप्ता गंभीर रूप से हताहत हो गए और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हालांकि, यह हमला किस तरह हुआ और जहाज को किस हथियार से निशाना बनाया गया, इसके सटीक और आधिकारिक विवरण का परिवार को अभी भी बेसब्री से इंतजार है। इस मनहूस खबर के आते ही परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया है।
बेटे की मौत की खबर से थावे बाजार में पसरा सन्नाटा
मृतक सोनू के पिता संजय गुप्ता थावे बाजार के एक प्रतिष्ठित और सीधे-साधे व्यवसायी हैं, जो वहां जूता-चप्पल की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इकलौते कमाऊ बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद मंगलवार को पूरे सम्मान और शोक में बाजार की दुकानें स्वतः स्फूर्त बंद हो गईं। जैसे ही इस अंतरराष्ट्रीय हादसे की जानकारी स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों को मिली, बड़ी संख्या में रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित परिवार को ढांढस बंधाने उनके पैतृक निवास पर पहुंचने लगे, जिससे हर आंख नम नजर आई।
मासूम बेटे के पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की कानूनी औपचारिकताएं
गहरे सदमे में डूबा पीड़ित परिवार अब केवल अपने लाडले के पार्थिव शरीर को अंतिम बार देखने और उसे भारत लाने की उम्मीद लगाए बैठा है। परिजनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मामला होने के कारण उन्हें अभी तक शव को स्वदेश वापस लाने की जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और दूतावास संबंधी औपचारिकताओं को लेकर कोई स्पष्ट और आधिकारिक दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसके चलते परिवार की व्याकुलता और मानसिक पीड़ा लगातार बढ़ती ही जा रही है।
केंद्र सरकार से जल्द से जल्द शव पैतृक गांव भिजवाने की गुहार
इस बेहद संवेदनशील और दुखद घड़ी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने एकजुट होकर भारत सरकार से मदद की अपील की है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और केंद्र सरकार से मांग की है कि दुबई स्थित भारतीय दूतावास से तुरंत संपर्क साधकर सभी आवश्यक राजनयिक प्रक्रियाएं युद्ध स्तर पर पूरी की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार सोनू के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द सम्मान सहित उसके पैतृक गांव थावे भिजवाने की व्यवस्था करे, ताकि सनातन परंपरा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।

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