पटना:बिहार में मानसून ने एक बार फिर करवट ली है और पूरे राज्य में बादलों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। राजधानी पटना सहित सूबे के कई प्रमुख जिलों में सुबह से ही रुक-रुक कर रिमझिम बारिश का दौर जारी है। आसमान में घने काले बादल छाए रहने के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए हैं, जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार को राज्य के एक बड़े हिस्से के लिए चेतावनी जारी की है, जिसके तहत कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ मेघगर्जन, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल आशंका जताई गई है।

उत्तर और पूर्वी बिहार में ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी

मौसम विभाग ने राज्य के कुछ विशिष्ट हिस्सों में प्रकृति के कड़े तेवर देखने की बात कही है, जिसके तहत विशेष रूप से पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, वैशाली और सीवान जिले के विभिन्न प्रखंडों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, पूर्णिया और कटिहार जिलों में अत्यंत भारी से बहुत भारी बारिश की गंभीर संभावना को देखते हुए प्रशासन की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में स्थानीय आपदा प्रबंधन ने आम नागरिकों को बेहद सतर्क रहने और बहुत जरूरी काम न होने पर घरों से बाहर नहीं निकलने की सख्त हिदायत दी है।

राजधानी समेत कई जिलों में यलो और ग्रीन अलर्ट का साया

बिहार के एक बड़े हिस्से में सुरक्षा के लिहाज से मध्यम स्तर की चेतावनी भी लागू की गई है। पटना, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, बेगूसराय, गया, भागलपुर और अररिया सहित उत्तर एवं पूर्वी बिहार के दर्जनों जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां बादलों की गड़गड़ाहट के साथ वज्रपात होने और करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं दूसरी तरफ, सारण, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और औरंगाबाद जैसे दक्षिण-पश्चिम बिहार के जिलों के लिए ग्रीन अलर्ट जारी हुआ है, जिसका तात्पर्य है कि इन क्षेत्रों में फिलहाल किसी बड़े मौसमी खतरे की आशंका नहीं है।

मौसम विभाग द्वारा सुरक्षा गाइडलाइन और विशेष अपील

बिगड़ते हुए मौसम को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनमानस और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक जरूरी एडवायजरी जारी की है। विभाग ने लोगों से पुरजोर अपील की है कि जब आसमान में बिजली कड़क रही हो, तब वे खुले मैदानों, जलजमाव वाले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों या ट्रांसफॉर्मर के पास बिल्कुल भी खड़े न हों। इसके साथ ही, खेतों में काम करने वाले किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे मौसम के ताजा बदलावों और सरकारी चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से समय रहते बचा जा सके।

जनजीवन और कृषि पर मानसूनी बारिश का प्रभाव

इस ताजा मानसूनी सिस्टम के दोबारा सक्रिय होने से जहां एक तरफ आम राहगीरों और दफ्तर जाने वाले लोगों को जलजमाव के कारण कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ यह बारिश राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित हो रही है। धान की रोपनी कर रहे किसानों के चेहरे खिल गए हैं क्योंकि खेतों को इस समय प्रचुर मात्रा में पानी की आवश्यकता थी। हालांकि, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बाढ़ और जलभराव जैसी संभावित स्थितियों से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं ताकि आपातकाल में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।