कामाख्या मंदिर में साल के 3 दिन क्यों नहीं होती पूजा, जानें अंबुबाची मेले का खास नियम
नई दिल्ली। भारत अपनी अनूठी संस्कृति और अद्भुत कलाओं के साथ-साथ अपने गहरे अध्यात्म और धार्मिक मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। खासतौर पर हिंदू धर्म में आस्था से जुड़े कई ऐसे चमत्कार देखने को मिलते हैं, जो विज्ञान को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं। हमारे देश में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो अपने भीतर सदियों पुराने रहस्यों को समेटे हुए हैं।
इन्हीं में से एक पूर्वोत्तर भारत के असम में स्थित मां कामाख्या देवी का पावन दरबार है, जो अपनी दिव्य और चमत्कारी शक्तियों के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का रहस्य आज भी लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है। यहां हर साल जून के महीने में आस्था, अध्यात्म और रहस्य का एक ऐसा अनोखा संगम देखने को मिलता है, जिसे पूरी दुनिया 'अंबुबाची मेला' के नाम से जानती है। आइए जानते हैं कि इस पावन मेले की क्या खासियत है।
रहस्यों से भरा मां कामाख्या का पावन दरबार
मां कामाख्या का यह चमत्कारी और पवित्र धाम असम के गुवाहाटी शहर में स्थित खूबसूरत नीलाचल पहाड़ियों पर बना हुआ है। हिंदू धर्म में पूजनीय सभी 51 शक्तिपीठों में कामाख्या मंदिर का स्थान बेहद खास, पूजनीय और सर्वोच्च माना गया है। इस भव्य मंदिर की सबसे बड़ी और हैरान कर देने वाली खासियत यह है कि यहां देश के बाकी मंदिरों की तरह देवी मां की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि यहां प्रकृति के एक अनोखे रूप की पूजा की जाती है।

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