जगदलपुर: लाल आतंक का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों को एक सामान्य पारिवारिक जीवन देने के लिए बस्तर पुलिस और प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय पहल की है। नक्सली संगठन के दबाव में कभी जबरन नसबंदी का दंश झेलने वाले इन युवाओं के जीवन में फिर से संतान सुख की खुशियां लौटाने की तैयारी की जा रही है। जगदलपुर के महारानी अस्पताल में आयोजित एक विशेष मेडिकल कैंप में एम्स (AIIMS) रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों की नसबंदी खोलने (रिकैनालाइजेशन) के लिए स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

जांच के बाद होगी 'रिकैनालाइजेशन' सर्जरी

इस विशेष शिविर में कुल 28 आत्मसमर्पित युवा नक्सलियों का प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद इन सभी की नसबंदी खोलने के लिए ऑपरेशन (रिवर्स वैसेक्टोमी) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस अनूठी पहल से मुख्यधारा में लौटे ये युवा न सिर्फ सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे, बल्कि अपने परिवार को आगे बढ़ाने का सपना भी पूरा कर सकेंगे।

पूर्व नक्सली कमांडर ने बयां किया संगठन का काला सच

"उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव रहे राजू सलाम ने नक्सली संगठन की क्रूरता बयां करते हुए बताया, 'मैं साल 2003 में नक्सली संगठन में शामिल हुआ था। 2009 में संगठन के भीतर ही मेरी शादी हुई और 2010 में संगठन के दबाव में मेरी जबरन नसबंदी कर दी गई। नवंबर 2025 में मैंने जगदलपुर मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया। आज मैं अपने परिवार को आगे बढ़ाने की उम्मीद लेकर जगदलपुर महारानी अस्पताल में नसबंदी खुलवाने आया हूँ।'"

दो दिनों में 30 जटिल ऑपरेशन करने का लक्ष्य

शिविर में पहुंचे यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय भंडारकर ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले इन युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नसबंदी रिवर्सल ऑपरेशन की सख्त जरूरत है। प्रशासन के सहयोग से इस बेहद जटिल और संवेदनशील चुनौती को स्वीकार करते हुए तीन ऑपरेशन थिएटर तैयार किए गए हैं। दो दिनों के भीतर लगभग 25 से 30 ऑपरेशन करने का लक्ष्य है। इसके बाद डॉक्टरों की दूसरी टीम दो हफ्ते बाद फिर जगदलपुर पहुंचेगी, जो बाकी बचे अन्य मरीजों का ऑपरेशन करेगी।

पहले भी 23 घरों में गूंजी है किलकारी: आईजी पी सुंदरराज

बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इस संबंध में बताया कि नक्सली संगठन एक सोची-समझी साजिश के तहत कैडर्स की शादी तो करा देते थे, लेकिन उन्हें पारिवारिक सुख से वंचित रखने के लिए उनकी नसबंदी कर देते थे। पुनर्वास नीति के तहत अब इनकी रिवर्स वैसेक्टोमी सर्जरी कराई जा रही है।

  • सफल ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले भी प्रशासन ने 52 आत्मसमर्पित जोड़ों की नसबंदी खुलवाई थी।

  • माता-पिता बनने का सुख: राहत की बात यह है कि उनमें से 23 जोड़ों को माता-पिता बनने का सौभाग्य मिल चुका है और वे आज समाज में बेहद सुखी और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं। इसी सफलता से प्रेरित होकर नए आत्मसमर्पित युवाओं ने भी नसबंदी खुलवाने की इच्छा जाहिर की थी।