दिल्ली HC का फैसला: राजनीतिक आलोचना पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी जनप्रतिनिधि या सांसद के राजनैतिक निर्णयों की आलोचना को उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकारों) का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। जस्टिस ने कहा कि यदि सांसद को लगता है कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया है, तो वे ऐसे मामलों में मानहानि (Defamation) का कानूनी विकल्प चुन सकते हैं।
एआई और डीपफेक के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सांसद ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
यह पूरा मामला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक से जुड़ा है। सांसद राघव चड्ढा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहचान के गलत इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। अपनी दलील में उन्होंने आरोप लगाया था कि विभिन्न सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों पर उनकी अनुमति के बिना उनकी तस्वीरों, चेहरे, आवाज और विशिष्ट पहचान का अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है।
भ्रामक कंटेंट और मॉर्फ्ड वीडियो पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग
राघव चड्ढा द्वारा दायर की गई इस याचिका में मुख्य रूप से एआई टूल्स के जरिए तैयार किए जा रहे डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीरों और जनता को गुमराह करने वाली भ्रामक सामग्रियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी डिजिटल पहचान और व्यक्तित्व तत्वों (Personality Elements) का व्यावसायिक व राजनैतिक लाभ के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर नियंत्रण पाना बेहद जरूरी है।
पर्सनैलिटी राइट्स और राजनैतिक आलोचना के बीच कोर्ट ने खींची लकीर
सुनवाई के दौरान अदालत ने डिजिटल राइट्स की सुरक्षा को तो अहम माना, लेकिन साथ ही लोकतंत्र में राजनैतिक आलोचना के अधिकार को भी रेखांकित किया। हाई कोर्ट ने साफ किया कि राजनैतिक मंच पर लिए गए फैसलों की समीक्षा या विरोध को किसी नेता के व्यक्तिगत अधिकारों के हनन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इस मामले में कोर्ट अब आगे की कानूनी कड़ियों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर सुनवाई जारी रखेगा।

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