आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: स्वतः संज्ञान लेकर मांगी रिपोर्ट
नगर निगम और प्रशासन आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और टीकाकरण में नाकाम
काटने से हो रही मौतों पर सीजेआई करेंगे सुनवाई
नई दिल्ली। आए दिन देश में आवारा कुत्तों के आतंक की खबरें देखने और सुनने को मिलती हैं। आवारा कुत्तों का सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग और बच्चे हो रहे हैं। कई लोगों की मौत भी हो चुकी है, बल्कि रेबीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ऐसी घटनाओं को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने आवारा कुत्तों के आतंक को कम करने के लिए खाना स्कीम शुरु की है। अब आवारा कुत्तों के मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों के हमलों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। एक रिपोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान खींचा। इस खबर में बताया गया कि शहरों और बाहरी इलाकों में हर दिन सैकड़ों लोग आवारा कुत्तों के शिकार हो रहे हैं। इन हमलों से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी फैल रही है, जिसका सबसे ज्यादा खतरा मासूम बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हैं। इस मुद्दे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले को उठाया।
जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस खबर को ‘बेहद परेशान करने वाला‘ बताया। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह खबर बहुत डरावनी है। हर दिन सैकड़ों लोग कुत्तों के काटने से पीड़ित हैं। रेबीज की वजह से छोटे बच्चे और बुजुर्ग अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने एक दुखद घटना का जिक्र किया, जिसमें दिल्ली के रोहिणी इलाके में 30 जून को एक 6 साल की बच्ची को एक रेबीज बीमारी से ग्रस्त कुत्ते ने काट लिया। इलाज के बावजूद बच्ची की 26 जुलाई को उसकी मृत्यु हो गई। डॉक्टरों ने शुरू में उसकी बिगड़ती हालत को सामान्य बुखार समझा, जिससे सही समय पर इलाज नहीं हो सका।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि इसे एक स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में दर्ज किया जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस आदेश और खबर की कॉपी को सीजेआई बीआर गवई के सामने रखा जाए, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके। यह कदम तब उठाया गया, जब कोर्ट ने देखा कि नगर निगम और प्रशासन आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके टीकाकरण में नाकाम रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर ध्यान दिया है।
बता दें 15 जुलाई 2025 को जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने भी आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की जगहों को लेकर चिंता जताई थी। कोर्ट का कहना है कि जानवरों के प्रति दया और लोगों की सुरक्षा में संतुलन जरूरी है। अब उम्मीद है कि इस मामले में जल्द सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि मासूम बच्चों और बुजुर्गों की जान बचाई जा सके।

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