सालों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को मिली मंजूरी, किसानों ने ली राहत की सांस
गुन्नौर तहसील के उधरनपुर अजमतनगर गांव में पिछले दो दशकों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लंबे समय से चली आ रही भूमि संबंधित विवादों और भ्रम की स्थिति को समाप्त करने के लिए सीओ चकबंदी राजकुमार वर्मा के नेतृत्व वाली चकबंदी विभाग की टीम ने पिछले एक माह से प्रभावी अभियान चलाकर अधिकतर किसानों की समस्याओं का समाधान किया है।
सोमवार को भी कानूनगो लेखराज के नेतृत्व में पुलिस लाइन से बुलाए गए पुलिस बल के सहयोग से चकबंदी टीम ने कई स्थलों पर पैमाइश कराई और प्रस्तावित चक के अनुसार कब्जा परिवर्तन कराया। इस दौरान मेड बंदी के साथ-साथ कई पुराने विवादों का भी मौके पर निस्तारण किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों का कब्जा किसी कारणवश छूटा था, उन्हें अब नए स्थानों पर नियमानुसार कब्जा दिया जा रहा है और अगले एक सप्ताह में शेष बचे सभी मामलों का समाधान कर लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गांव में वर्ष 2002 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, जबकि वर्ष 2016 में एक बार कब्जा परिवर्तन भी कराया गया था। लेकिन उस दौरान नदी की भूमि को चकबंदी से बाहर रखने के कारण विवाद और गहरा गया, जिससे कई मामले न्यायालय में लंबित हो गए।
अब इन मामलों में भी अधिकांश का निस्तारण हो चुका है और केवल कुछ मामूली वाद शेष हैं। किसान भूप सिंह ने बताया कि चकबंदी टीम के द्वारा उन्हें भी उनके अवशेष भूमि को दिलाया गया है। इस दौरान किस सुखराम ने बताया कि कई वर्षों से उन्हें जमीन नहीं मिली थी। अब चकबंदी की टीम मौके पर आई पैमाइश करके भूमि दी गई है, गांव में किसान संतुष्ट हो रहे हैं।

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