मुरैना में रोजी रोटी के लिए निकले बाप-बेटे को कंटेनर ने कुचला, घर पर नहीं बचा कमाने वाला कोई
मुरैना: घर से काम पर निकले बाप-बेटे की सड़क हादसे ने जान ले ली. घटना नेशनल हाईवे 44 पर बानमोर थाना के पास हुई. बताया जा रहा है कि बाइक पर सवार बाप-बेटे को पहले ट्रैक्टर ट्रॉली ने टक्कर मार दी. जिससे वे बीच सड़क पर जा गिरे. तभी पीछे से आ रहे कंटेनर ने उन्हें कुचल दिया. जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई. इस घटना से गुस्साए परिजनों ने हाईवे पर जाम लगा दिया और आर्थिक सहायता की मांग की.
कंटेनर को जब्त कर थाने ले गई पुलिस
दरअसल, बानमौर कस्बे के रहने वाले सुरेश प्रजापति रविवार सुबह अपने बेटे लंकेश प्रजापति के साथ बाइक पर सवार होकर अपनी रोजी-रोटी के लिए काम पर निकले थे. तभी सड़क पर रेत से भरे ट्रैक्टर ट्राली के चालक ने अपनी लापरवाही के कारण बाइक सवारों को टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही दोनों बाप-बेटा उछलकर बीच सड़क पर गिर गए. इसी समय पीछे एक कंटेनर आ रहा था, जिसने दोनों को अपनी चपेट में ले लिया. बाप-बेटा दोनों उस कंटेनर के पहिया के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कंटेनर को जब्त कर थाने ले आई है.
परिजन ने किया चक्का जाम
घटना की खबर लगते ही मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे और आर्थिक सहायता राशि की मांग करते हुए हाईवे पर जाम लगा दिया. परिजन ने बताया कि दोनों की मौत के बाद अब घर पर कमाने वाला कोई नहीं बचा है. इस पूरे मामले की सूचना मिलते ही मौके पर एसडीओपी बिंदु परमार पहुंच गई. उन्होंने अधिकारियों से बातचीत करने के बाद मृतक के परिजनों को रेड क्रॉस सोसायटी से 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराया. जिसके बाद समझाइश देकर यातायात बहाल कराया.
एसडीओपी बिंदु परमार ने बताया कि "बाप-बेटे बाइक पर सवार होकर काम पर जा रहे थे. जिनकी सड़क हादसे में मौत हो गई है. घटना में शामिल कंटेनर को जब्त कर थाने में रखवा दिया गया है. लेकिन ट्रक चालक फरार हो गया है."

राशिफल 26 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
राहुल गांधी का बड़ा बयान: 'कॉकरोच आंदोलन' के बाद छात्रों पर हिंसा को लेकर सरकार पर निशाना
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शरद पवार का बड़ा दावा, बोले- 'PM से बातचीत के बाद बदला घटनाक्रम'
'फोन छूने पर बेरहमी से पीटते थे', नौकरी दिलाने के नाम पर युवकों के साथ हुआ खौफनाक खेल
जिस सरकार ने कहा- इस्तीफे नहीं होते, उसी में 12 साल में कई बड़े नेताओं ने छोड़ा पद